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शनि राहु की युति और नीचस्थ मंगल Untitled

  • Writer: seemavedic
    seemavedic
  • Apr 6, 2025
  • 3 min read

शनि राहु की युति और नीचस्थ मंगल का प्रभाव कैसा होगा।


वैदिक ज्योतिष में ग्रह गोचर के अनुसार भविष्य आकलन करने का प्रवधान है और उसी के अनुसार वर्तमान समय और भविष्य में घटने वाली घटनाओं और प्रभावों का विश्लेषण ज्योतिषविद् द्वारा किया जाता है।

ग्रह गोचर के अनुसार गत 2024 जितना घटना प्रधान रहा‌है‌, वर्तमान वर्ष भी उथल-पुथल वाला और आने वाले दशकों की रूपरेखा तय करने वाला है और इस प्रकार से यह‌ वर्ष ,विशेष कर वर्तमान काल का ग्रह गोचर के दूरगामी प्रभाव भारत और विश्व के राजनीतिक, आर्थिक,सामाजिक, पारिवारिक, प्राकृतिक और भौगोलिक परिस्थितियों पर पड़ने वाले हैं जो भविष्य कै समीकरण तय करेंगे।

वर्तमान ग्रह गोचर कै इस संपूर्ण परिदृश्य के विषय में,पहले भी दो विश्लेषण लिख चुकी हूं।यह लेख या विश्लेषण उसी क्रम में तृतीय है और अति महत्वपूर्ण है।

नवसंवत्सर के साथ ही सूर्यग्रहण की‌ घटना,मीन में शनि के गोचर के साथ ही षडग्रही योग और शनि की राहु के साथ घनिष्ठ युति,और लंबे काले से मंगल का अति विशेष गोचर जो दो राशियों के बीच ही आगे पीछे घूम रहा है।मंगल‌ का आगे जाते जाते,पीछे लौटना और फिर से 30 °पार करके, अपनी नीचस्थ राशि में पुनः वापस लौटना। और ऐसे वक्र गति से चलते राहु का शनि से योग होना। यह ज्योतिष की अति विशेष घटना है ।

आकाश में घट रही इन सारी घटनाओं का असर हमें पृथ्वी पर सब ओर दिख ही रहा है। भूकंप,आग लगने की घटनाएं, पहाड़ों पर भूस्खलन,सड़क दुर्घटनाएं, राजनीतिक उठा-पटक, सांप्रदायिक तनाव, विरोध प्रदर्शन, असंतोष, रोग,आपसी वैमनस्यता, फ्राड, पड़ोसी देशों में विवाद, संस्थाओं और संगठनों में टूट फूट सभी इसी ग्रह गोचर से प्रभावित घटनाएं हैं। विशेष रूप से आग लगने की घटनाओं के प्रति सावधानी बहुत आवश्यक है, अन्यथा आर्थिक के साथ ही शारीरिक रूप से भी नुकसान हो सकता है।

ऐसे में उपरोक्त गोचर भौगोलिक और प्राकृतिक तथा राजनीतिक एवं अंतर्राष्ट्रीय संबंधों को लेकर किसी अप्रत्याशित घटना को भी ‌जन्म दे‌ सकते हैं। भूखंडो और‌ देशो के अतिरिक्त समुद्रो,सागरों , खाड़ी में भी युद्ध या‌ दुर्घटनाओं की संभावना है। आग्नेय के साथ ही रसायनिक हथियारों का भी प्रयोग होता दिख सकता है।

धार्मिक और‌ सांप्रदायिक विवाद जहां एक ओर‌ चरम पर होंगे, वहीं दूसरी ओर धार्मिक तीर्थों कै अतिरिक्त नदियों और सागर तटों पर पर्यटन में वृद्धि होगी। भीड़भाड़ वाली जगहों पर भगदड़ और घुटन ( सफोकेशन) की परिस्थितियों कै प्रति सावधान रहने की सलाह है।

भावनात्मक संबंधों पर विशेष ध्यान दे।भावातिरेक के कारण भी स्थितियां बिगड़ सकती है।

अपराधों में वृद्धि होती दिख सकती है और कुछ वीभत्स प्रकार के अपराध प्रकाश में आ सकते‌ हैं।

भारत के संदर्भ में ,यह गोचर लाभदायक होगा आर्थिक रूप से लाभकारी परिस्थितियों का निर्माण होगा।

वैश्विक स्तर पर भारत अपनी धाक जमाने में, और अगुवाई करने‌ में सफल‌ होगा।

धार्मिक मसले हल होगें , किंतु घरेलू स्तर पर असंतोष में वृद्धि होगी। न्यायालय का रवैया सहयोगात्मक होगा। गुरूओं और गुरू घंटालों दोनों ही तरह के लोग चर्चा में रहेगें। कुछ लोग एक्सपोज़ भी हो सकते हैं। कोई बड़े स्कैम का भी‌ खुलासा‌हो सकता है।

शैक्षणिक संस्थानों से संबंधित सुधार कार्य हो सकते हैं।

कूटनीति अपने सर्वोच्च स्तर पर‌ रहेगी । और सभु के लिए सरकार, कर्मचारी, गृहणी इत्यादि के लिए अवकाश या आराम नहीं अपितु अतिरिक्त कार्यभार का काल‌ रहेगा। और इतने प्रभावों के बाद भी मानसिक स्तर पर उदासीनता या विरक्ति की भावना बार बार हावी हो सकती है।

और अंत में शनि राहु की यज्ञ युति एक कार्मिक युति है, अर्थात आप पीछे के समय में जैसे भी कार्य करके आये है,(पीछे से अर्थ बहुत पीछे या पूर्व जन्म ही नहीं है,) उसका हिसाब किताब अब होने वाला है और फल अभी‌और आगे भी‌ धीरे -धीरे मिलने वाले हैं।

यदि आप एक साफ सुथरा जीवन जीने वाले, मानवीय मूल्यों में विश्वास रखने वाले,छल कपट से दूर , नैतिक कार्यों में विश्वास रखने वाले हैं तो नि:संदेह आपको इस गोचर से डरने की आवश्यकता नहीं है।इसका आकलन आप स्वयं कर सकते हैं। लेकिन जैसे गेहूं के साथ घुन भी पिस जाता है , वैसे ही वर्तमान ग्रह गोचर के काल में अपने कार्य कलापों और घूमने फिरने, समूहों में व्यवहार करते समय थोड़ा ध्यान रखें। बाकी तो प्रभु सुमिरन ही सबका‌ आश्रय है ।

जय श्रीकृष्ण 🙏🙏🌹🌹

सीमा श्रीवास्तव


 
 
 

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