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गुरु का मिथुन में वक्री गोचर

  • Writer: seemavedic
    seemavedic
  • Dec 20, 2025
  • 4 min read

देवगुरु बृहस्पति का वापस मिथुन में लौटना


भौगोलिक और राजनीतिक उतार चढ़ाव में देवगुरु बृहस्पति का बार बार और जल्दी जल्दी गोचर बदलना वैश्विक उथल पुथल को जहां एक ओर बढ़ा रहा है, वहीं दूसरी ओर असमंजस की परिस्थितियां भी उत्पन्न कर रहा‌ है।पुराने विश्लेषणों में इसके  ऊपर बार बार लिखा है, लेकिन काल इतना घटना प्रधान हो चुका है कि ग्रहों के हर बदलाव के साथ परिणाम बदलते जा रहे हैं।

अपनी सामान्य चाल चलते‌ हुए गुरु महाराज ने 14 म‌ई 2025 में वृषभ राशि से मिथुन में प्रवेश किया था , लेकिन अपने सामान्य प्रवास को छोड़कर गुरु 18 अक्टूबर में कर्क राशि में प्रविष्ट हो ग‌ए , जहां से मात्र पच्चीस दिन में ही 11 नवंबर में ही वह वक्रावस्था में आकर , पुनः 5  दिसंबर को वह मिथुन में लौट‌ ग‌ये ।

जो भी जातक यूट्यूब और इंटरनेट से ज्ञान पा पाकर अपनी कुंडली विचारते रहते हैं,( दूसरों की भी ) वो पहले ही गुरु की इस चाल से हैरान थे कि अभी तो ऐसा होना‌ था या‌ वैसा होना था और जब तक सब ग्रह अनुकूल हुए,तब तक गुरु जी राशि बदल ग‌ए और फिर जब वापस आये तो ,लगा अब तो काम बन ही जायेंगे, लेकिन बात तो बन ही नहीं रही । मिथुन राशि में गोचर का जो प्रामिस था ,वो वापस आकर भी गुरु महाराज पूरा नहीं कर रहे,( गुरु को कभी कम नहीं आंकना चाहिए,वो कभी भी चमत्कार कर सकते हैं ।)

तो नित्य बदल रही परिस्थितियों में भी गुरु का गोचर मनोनुकूल परिणाम क्यों नहीं दे रहा, क्यों इतनी उठा पटक हो रही है?

वक्री गुरु का मिथुन राशि में गोचर , जैसे साधु‌ वापस धूनी जलाने मठ में लौटा हो। कुछ सबक‌ रह गया था , कोई चैप्टर जो परीक्षा के लिए बहुत जरूरी है, लेकिन पढ़ाने से रह गया है ‌‌। गुरु वहीं शिक्षा, ज्ञान,और चेतावनी देने आए हैं।

मिथुन राशि से वक्री गुरु धनु को‌ सप्तम दृष्टि दे रहे हैं।

तुला और कुंभ को भी सक्रिय करके अनुकूल शुभ फल प्रदान करने वाले हैं । वृष ,कन्या , वृश्चिक और मकर पर भी गुरु का प्रभाव शुभ फल कारी है।


धनु और मीन राशि से केन्द्र में बैठ कर गुरु सभी प्रकार के शुभ फल देने का वचन देते हैं। बृहस्पति का वक्री गोचर सुख , प्रसन्नता,धन‌ और भक्ति को देने वाला है । जबकि शनि भी मार्गी हो चुके हैं तो , गुरु का गोचर रूके हुए कामों को पूरा करने  वाला, युद्ध और लड़ाई झगड़ों को परस्पर सुलझाने वाला होना चाहिए, कहीं कहीं ऐसी संभावनाएं बनती दिखती हैं लेकिन फिर परिणाम निराशा उत्पन्न करते हैं ‌।

गुरु से समसप्तक मंगल की उपस्थिति और दशम में शनि का गोचर गुरु के फलों को विलंबित कर रहें हैं , साथ ही परिणाम की‌ वृत्ति को भी प्रभावित कर रहे हैं। राहु का कुंभ में गोचर और‌ गुरू के साथ नव पंचम परस्पर दृष्टि संबंध धार्मिक मसलों को विवादास्पद और संघर्ष युक्त बना रहा है।

गुरु मंगल के संबंध अग्नि से संबंधित घटनाओं में वृद्धि करेंगे। परस्पर वाद विवाद,मार पीट ,लड़ाई झगड़ा बढ़ेगा।

छोटी सी बात/छोटी सी चिंगारी, बड़े झगड़े/ अग्नि कांड में बदल सकती है , दबे हुए युद्ध फिर से सिर उठा सकते हैं।सावधान रहें।

तेजी से बदलती परिस्थितियों और घटना प्रधान परिदृश्य से असमंजस की स्थितियां बनेंगी और निर्णायक क्षमता प्रभावित होंगी। समाज में सब तरफ अफरा तफरी का माहौल सा महसूस होगा। जनमानस में अनुशासन की कमी से असहजता बढ़ेगी। विभिन्न कार्य कलापों में स्पष्टता की कमी महसूस होगी।

लोगों में उद्दंडता और उजड्डपन बहुत बढ़ जायेगा।

विद्यालयों और विद्यार्थियों के प्रति विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता है , वर्तमान परिस्थितियों में यह क्षेत्र विशेष संवेदनशील हैं। बच्चों की समस्याओं को धैर्यपूर्वक सुने और सुलझायें । विद्यार्थियों और संस्थानों पर अतिरिक्त निगरानी रखें और विवाद का तुरंत निवारण करें ।

हवाई जहाज और हवाई यात्राओं में समस्याएं बनी रहेंगी। हवाई यात्रा करने वाले यात्रियों को इस काल में पहले से अधिक, दीर्घकालिक और तीव्र टरबुलेंस का सामना करना पड़ सकता है।

समुद्र की गतिविधियों में अभूतपूर्व बदलाव आ सकते हैं। समुद्र से लगे क्षेत्रों/ देशों और समुद्री जल क्षेत्र मे युद्ध जैसी परिस्थिति बनी सकती हैं।

चक्रवात , तूफान के अलावा समुद्र में भूकंप और सूनामी जैसी घटनाएं भी घट सकती हैं।

बैंकिंग क्षेत्र में बड़े बदलाव आ सकते हैं। विशेष रूप से बैंकिंग शेयरों में तेजी दिखाई देगी।

वैवाहिक जीवन में सौहार्द और  सामंजस्य बनाए रखने के लिए धैर्य और समझदारी दिखाएं अन्यथा वर्तमान गोचर में छोटी सी बात बड़ी और उग्र हो सकती है।

गुरु अनुशासन और परंपरा के संरक्षक हैं,और कोई भी अवैध, अनैतिक कार्य/ संबंध करने, रखने वाले लोगों के लिए यह गोचर प्रतिकूल प्रभाव देगा।

लेकिन ऐसा नहीं है कि सबकुछ नकारात्मक ही है।संयम और धैर्य और सूझ-बूझ के साथ समय व्यतीत करें तो यह गोचर कुछ दिनों के बाद ही अच्छे और अनुकूल फल प्रदान करने वाला साबित होगा।

किसी न‌ई दवा,जीवन रक्षक डिवाइस का आविष्कार भी हो सकता है। संयमित जीवन चर्या वाले लोगों को  प्रयासों से लाभ मिलेगा और पुरानी बीमारी पूर्णतः ठीक हो सकती है,यह गुरु गोचर का आशीर्वाद है। धर्म-कर्म, नीति नियम सौर संयमित, जीवनशैली वाले लोगों को यह गोचर अनुकूल परिणाम देगा।

जय श्री कृष्ण 🙏🌺

सीमा श्रीवास्तव









 
 
 

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